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Shri Narendra Modi
श्री नरेंद्र मोदी
भारत के प्रधान मंत्री
प्रभागों
विदेश व्यापार (उत्तर पूर्व एशिया)
मंडल के कार्य

विदेश व्‍यापार (उत्‍तर पूर्वी एशिया) प्रभाग का कार्य चीन जनवादी गणराज्‍य, हांगकांग, ताइवान, जापान, कोरिया गणराज्‍य, कोरिया लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्‍य, मकाओ तथा मंगोलिया अर्थात उत्‍तर पूर्वी एशिया क्षेत्र के साथ भारत के व्‍यापार एवं आर्थिक सहयोग से संबंधित सभी क्षेत्रीय मामलों को देखना है।
ड्यूटी में संस्‍थानिक तंत्रों जैसे कि आर्थिक संबंध, व्‍यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर संयुक्‍त समूह (जेईजी) / चीन के साथ संयुक्‍त कार्य समूह (जेडब्‍ल्‍यूजी), भारत – जापान सीईपीए तथा भारत – कोरिया सीईपीए के तहत संयुक्‍त समितियों एवं उप समितियों के माध्‍यम से तथा इन देशों के साथ अनौपचारिक बैठकों, वार्ता एवं परामर्श का आयोजन करके व्‍यापार एवं आर्थिक सहयोग पर इन देशों के साथ भागीदारी शामिल है।
कार्य में समय समय पर इन देशों एवं क्षेत्रों के संबंध में व्‍यापार सांख्यिकी का संग्रहण, संकलन एवं विश्‍लेषण तथा व्‍यापार एवं आर्थिक सहयोग पर इन देशों में भारतीय मिशनों के साथ चर्चा भी शामिल है।

प्रभाग के अधिकारी

क्षेत्र की व्‍यापार सांख्यिकी (एनईए क्षेत्र)

उत्‍तर पूर्वी एशिया जिसमें चीन, जापान, कोरिया गणराज्‍य, हांगकांग, ताइवान आदि आते हैं, के साथ 2015-16 में द्विपक्षीय व्‍यापार का मूल्‍य 124.95 बिलियन अमरीकी डालर था जो भारत के कुल व्‍यापार का 19.42 प्रतिशत है। एनईए देशों को निर्यात का मूल्‍य 30.84 बिलियन अमरीकी डालर था, जो भारत के कुल निर्यात का 11.76 प्रतिशत है तथा एनईए देशों से आयात का मूल्‍य 94.11 बिलियन अमरीकी डालर था जो भारत के कुल आयात का 24.7 प्रतिशत है। एनईए देशों के साथ भारत का व्‍यापार घाटा 2015-16 में 63.28 बिलियन अमरीकी डालर था जो भारत के कुल व्‍यापार घाटे (118.72 बिलियन अमरीकी डालर) का 53.3 प्रतिशत है।

एनईए के साथ कुल व्‍यापार में चीन का हिस्‍सा 56.6 प्रतिशत है, जबकि हांगकांग, जापान और कोरिया ने क्रमश: 14.5 प्रतिशत, 11.6 प्रतिशत और 13.3 प्रतिशत का योगदान किया। ताइवान, मंगोलिया, मकाऊ और कोरिया लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्‍य ने शेष 4 प्रतिशत का योगदान किया। भारत के कुल व्‍यापार में चीन का हिस्‍सा 10.99 प्रतिशत है, जबकि हमारे कुल व्‍यापार घाटे में इसका हिस्‍सा 44.38 प्रतिशत है।

व्‍यापार के अलावा एनईए देश एक साथ मिलकर इस समय 4233 बिलियन अमरीकी डालर के कुल निर्यात और 3548.7 बिलियन अमरीकी डालर के आयात तथा 7781 बिलियन अमरीकी डालर के कुल व्‍यापार के साथ विश्‍व में सबसे प्रभावशाली आर्थिक खिलाडि़यों में हैं। उच्‍च विकास दर के साथ चीन, कोरिया, ताइवान और हांगकांग अग्रणी अर्थव्‍यवस्‍था हैं; वे भारत के लिए महत्‍वपूर्ण निवेश साझेदार हो सकते हैं। एनईए देशों के साथ भागीदारी भारत की ‘पूरब में काम करो नीति’ का भी अभिन्‍न अंग है जिसके तहत उत्‍तरी अमेरिका और यूरोप के परंपरागत क्षेत्रों से आगे भारत की आर्थिक भागीदारी का विस्‍तार करने का प्रयास किया जाता है। 2010-11 से 2015-16 के दौरान उत्‍तर पूर्व एशिया के देशों के साथ व्‍यापार को सारणी में दर्शाया गया है :

सारणी 1 : उत्‍तर पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्‍यापार

(मूल्‍य मिलियन अमरीकी डालर में)

वर्ष निर्यात आयात कुल व्‍यापार व्‍यापार संतुलन
2010-11 37,315.76 76,109.73 1,13,425.50 (-) 38,793.97
2011-12 45,349.59 94,883.00 1,40,232.59 (-) 49,533.41
2012-13 39,437.08 89,907.33 1,29,344.40 (-) 50,470.25
2013-14 40,816.49 84,372.93 1,25,189.41 (-) 43,556.44
2014-15 37,788.22 93,812.80 1,31,601.02 (-) 56,024.58
2015-16 30,835.10 94,110.44 1,24,945.54 (-) 63,275.34
स्रोत : डी जी सी आई एंड एस

2017 में नियोजित मौजूदा गतिविधियां
भारत – कोरिया सीईपीए समीक्षा वार्ता शुरू हो चुकी है
चीन के साथ मंत्री स्तर पर संयुक्‍त आर्थिक समूह की 11वीं बैठक की योजना बनाई गई है
ताइवान के साथव संयुक्‍त कार्य समूह की बैठक की योजना बनाई गई है
भारत – जापान सीईपीए के तहत सचिव स्‍तर पर संयुक्‍त समिति की चौथी बैठक

व्‍यापार करार एवं वार्ता
भारत – कोरिया सीईपीए

भारत तथा कोरिया गणराज्‍य के बीच एक व्‍यापक आर्थिक भागीदारी करार (सीईपीए) पर 7 अगस्‍त, 2009 को हस्‍ताक्षर किये गये थे। सीईपीए 1 जनवरी 2010 से प्रभावी हुआ तथा इस समय इसके उन्‍नयन के लिए वार्ता चल रही है।

भारत – जापान सीईपीए

भारत और जापान के बीच एक व्‍यापक आर्थिक भागीदारी करार (सीईपीए) पर हस्‍ताक्षर 16 फरवरी, 2011 को किए गए थे। यह करार 1 अगस्‍त, 2011 से प्रवृत्‍त हुआ है।

व्‍यापार संवर्धन की गतिविधियां

व्‍यापार संवर्धन की गतिविधियों में विदेशों में / एनईए देशों में आयोजित व्‍यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों में उद्योगों के साथ व्‍यापार केन्‍द्रों / निर्यात संवर्धन परिषदों द्वारा भागीदारी शामिल है।
व्‍यापार को बढ़ावा देने एवं सुगम बनाने के लिए समय समय पर विभिन्‍न स्‍तरों पर द्विपक्षीय बैठकों का आयोजन करना।

आरटीआई से संबंधित मामले

जापान और दक्षिण कोरिया के साथ हस्‍ताक्षरित व्‍यापार करार निम्‍नलिखित लिंक पर वाणिज्‍य विभाग की वेबसाइट पर उपलब्‍ध हैं :

…5 अप्रैल 2014 तक की स्थिति के अनुसार

भारत – जापान सीईपीए : http://www.commerce.gov.in/writereaddata/pdf_download/IJCEPA_Basic_Agreement.pdf

भारत – कोरिया सीईपीए : http://www.commerce.gov.in/writereaddata/trade/INDIA%20KOREA%20CEPA%202009.pdf