स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) राज्य व्यापार निगम

एसटीसी की स्थापना 18 मई 1956 को मुख्य रूप से पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ व्यापार करने और देश से निर्यात के विकास में निजी व्यापार और उद्योग के प्रयासों के पूरक के लिए की गई थी। एसटीसी ने देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने भारत में बड़े पैमाने पर उपभोग की आवश्यक वस्तुओं (जैसे गेहूं, दाल, चीनी, खाद्य तेल, आदि) और औद्योगिक कच्चे माल के आयात की व्यवस्था की और भारत से बड़ी संख्या में वस्तुओं के निर्यात के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

एसटीसी के पास 60 करोड रूपए की इक्विटी पूंजी है। दिनांक 31.03.2020 तक, एसटीसी की इक्विटी में भारत सरकार का हिस्सा 90 प्रतिशत था। दिनांक 01.12.2021 को निगम में कुल जनशक्ति 168 थी।

एसटीसी के वर्तमान निदेशक मंडल में सीएमडी के अतिरिक्त प्रभार के साथ निदेशक (कार्मिक), एक निदेशक (विपणन), निदेशक (वित्त), एमएमटीसी जिनके पास निदेशक (वित्त) एसटीसी का अतिरिक्त प्रभार है और वाणिज्य मंत्रालय से दो पदेन निदेशक शामिल हैं। वर्तमान में, एसटीसी के बोर्ड में सात स्वतंत्र निदेशक हैं।

एसटीसीएल लिमिटेड, एसटीसी की एक सहायक कंपनी, समापन की प्रक्रिया में है और उसने 2014-15 के बाद से अपनी सभी व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कर दिया है।

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